Saturday, January 3, 2015

Its Mahh Thaught...

नंगे पाव चलता इन्सान को लगता है
.
कि "चप्पल होते तो कितना अच्छा होता"
.
बाद मेँ,
"साइकिल होती तो कितना अच्छा होता"
.
उसके बाद,
"मोपेड होता तो थकान नही लगती"
.
बाद मेँ सोचता है
"मोटर साइकिल होती तो बातो-बातो मेँ
रास्ता कट जाता"
.
फिर ऐसा लगता है,
"कार होती तो धुप नही लगती"
.
फिर लगता है कि,
"हवाई जहाज होती तो इन ट्राफिक
कि झंझट नही होती"
.
जब हवाई जहाज मेँ बेठकर नीचे हरे-भरे घास
के मैदान
देखता है तो सोचता है,
कि "नंगे पाव घास मेँ चलता तो दिल
को कितनी तसल्ली मिलती"
.
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"जरुरत के मुताबिक जिंदगी जिओ -
ख्वाहिशों के मुताबिक नहीं।
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“क्योंकि जरुरत
तो फकीरों की भी पूरी हो जाती है और
ख्वाहिशें बादशाहों की भी अधूरी रह
जाती है”....


PRABHAT SINGH

Mai Aur Mera Takiya

Takiya bheeg gya mera khaare pani se.... Jabse alag hua hai wo kirdar meri kahani se... Yhan mai kisi aur ladki se najaren bhi nahi mila pa ...