Wednesday, March 1, 2023

समझ नहीं आता

 कभी कभी थकान का कारन, समझ नहीं आता,

हम चलते रहते हैं, रास्ता मगर रास नहीं आता,

खड़े रहते हैं अपने अतीत के खँडहर पर,

अपने आने वाले कल के मकान को खड़ा करने की कोशिश में,

और हार रोज़ उठ कर खड़े होने का मकसद  समझ नहीं आता,

बैठे छलक जाता है यूँ ही कभी एक आंसू,

इस आंसू का मलाल समझ नहीं आता,

कुछ तो खो गया है, हंसी, चाल की उछाल या मैं, समझ नहीं आता,

घबराहट के दिन, भारी रातें, मन में उठ रहे सवाल किससे करें, समझ नहीं आता,

फिर भी चल रहे हैं, दौड़ रहे हैं, उम्मीद को जोड़ रहे हैं, ये हौसला कहाँ से आता है, समझ नहीं आता!!

Mai Aur Mera Takiya

Takiya bheeg gya mera khaare pani se.... Jabse alag hua hai wo kirdar meri kahani se... Yhan mai kisi aur ladki se najaren bhi nahi mila pa ...